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कक्षा 5 के लिए पाठ 1 जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता "विमल इंदु की विशाल किरणें" पर आधारित एक विस्तृत पाठ योजना (अभ्यास कार्य के हाल के साथ)

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शिक्षण योजना (Lesson Plan)
कक्षा: 5
विषय: हिन्दी 
समयावधि: 40 मिनट
पाठ संख्या: 01
प्रकरण (Topic): विमल इंदु की विशाल किरणें (कविता)
1. सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes)
छात्र ईश्वर की सर्वव्यापकता और प्रकृति के सौंदर्य को समझ सकेंगे।
कविता का सस्वर वाचन और उचित लय-ताल के साथ पाठ कर सकेंगे।
कविता में आए कठिन शब्दों (जैसे: अनादि, मनोरथ, निनाद) के अर्थ समझकर उनका वाक्य प्रयोग कर सकेंगे।
2. आवश्यक संसाधन (Teaching Aids)
पाठ्यपुस्तक (कलख/वाटिका)
दीक्षा ऐप (QR कोड स्कैन हेतु)
चंद्रमा, सागर और नदियों के चित्र
3. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching-Learning Process)
(क) प्रस्तावना (Introduction) - 5 मिनट
शिक्षक छात्रों से कुछ पूर्व ज्ञान आधारित प्रश्न पूछेंगे:
बच्चों, हमें प्रकाश कहाँ-कहाँ से मिलता है? (संभावित उत्तर: सूरज, चाँद, तारे)
रात में चाँद की रोशनी कैसी लगती है?
इस पूरी दुनिया को बनाने वाला कौन है?
(ख) पाठ का प्रस्तुतीकरण (Presentation) - 25 मिनट
आदर्श वाचन: शिक्षक कविता का उचित आरोह-अवरोह और भाव के साथ पाठ करेंगे।
अनुकरण वाचन: छात्र शिक्षक के पीछे-पीछे कविता की पंक्तियों को दोहराएंगे।
भावार्थ स्पष्टीकरण:
(ग) शब्दार्थ (Vocabulary)
विमल: स्वच्छ/साफ
इंदु: चंद्रमा
अनादि: जिसका कोई आरंभ न हो (हमेशा से रहने वाला)
निनाद: गूँज/ध्वनि
मनोरथ: मन की इच्छा
4. अभ्यास कार्य एवं मूल्यांकन (Assessment)
बोध प्रश्न:
कविता में 'प्रसार' की तुलना किससे की गई है?
नदियाँ क्या कर रही हैं?
लहरों की गूँज में किसकी प्रशंसा के गीत हैं?
गतिविधि: छात्र अपनी उत्तरपुस्तिका में चाँद और समुद्र का सुंदर चित्र बनाएँगे।
5. गृहकार्य (Homework)
कविता की आठ पंक्तियाँ कंठस्थ (याद) करके आएँ।
कविता में आए 'पर्यायवाची' शब्दों की सूची बनाएँ (जैसे: इंदु-चाँद, सागर-समुद्र)।

अभ्यास कार्य का हल (Solution)

1. बोध प्रश्न : उत्तर लिखिए
(क) सही मिलान (क्रम):
ईश्वर का प्रकाश = विमल इंदु की विशाल किरणों के रूप में
उसकी दया का प्रसार = सागर के रूप में
उसकी प्रशंसा के राग = सागर की लहरों के गान में
ईश्वर का मंद हास = चाँदनी के रूप में
ईश्वर के हँसने की धुन = नदियों के निनाद में
(ख) परमात्मा को 'दयानिधि' क्यों कहा गया है?
उत्तर: परमात्मा को 'दयानिधि' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह दया के भंडार हैं और समस्त जगत पर उनकी दया सागर की तरह विशाल और असीमित है।
(ग) तरंगमालाएँ क्या कर रही हैं?
उत्तर: तरंगमालाएँ (लहरों के समूह) ईश्वर की प्रशंसा के राग गा रही हैं।
(घ) प्रभु की दया की तुलना सागर से क्यों की गई है?
उत्तर: जिस प्रकार सागर का विस्तार बहुत बड़ा और अनंत होता है, उसी प्रकार प्रभु की दया भी असीम है, जिसका कोई अंत नहीं है। इसलिए प्रभु की दया की तुलना सागर से की गई है।
2. पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) तुम्हारे हँसने की धुन में नदियाँ, निनाद करती ही जा रही हैं।
भाव: इस पंक्ति का अर्थ है कि नदियों के कल-कल बहने की मधुर आवाज़ में ऐसा प्रतीत होता है मानो ईश्वर स्वयं मंद-मंद मुस्कुरा रहे हों और उनके हँसने की ध्वनि प्रकृति में गूँज रही हो।
(ख) तेरी प्रशंसा का राग प्यारे, तरंगमालाएँ गा रही हैं।
भाव: कवि कहते हैं कि सागर में उठने वाली अनगिनत लहरें जब किनारे से टकराती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे वे सामूहिक रूप से ईश्वर की महिमा और प्रशंसा के गीत गा रही हों।
3. सोच-विचार : बताइए
(क) प्रकृति द्वारा निर्मित दस चीजें:
सूर्य, चंद्रमा, तारे, नदियाँ, पर्वत, सागर, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, हवा, मिट्टी।
(ख) मानव द्वारा निर्मित बीस चीजें:
किताब, कलम, मेज, कुर्सी, पंखा, कार, मोबाइल, कपड़े, मकान, सड़क, पुल, हवाई जहाज, कंप्यूटर, सुई, साइकिल, जूते, टेलीविजन, घड़ी, रेलगाड़ी, बोतल।
4. भाषा के रंग
(क) तुकांत शब्द (Rhyming Words):
इंदु : बिंदु
धुन : सुन / बुन
माया : काया / छाया
लीला : पीला / नीला
मिला : खिला / सिला
(ख) समानार्थी शब्द (Synonyms):
प्रकाश : उजाला, ज्योति
सागर : समुद्र, जलधि
मनोरथ : इच्छा, कामना
जगत : संसार, दुनिया
तरंग : लहर, हिलोरे
7. इस कविता को ध्यानपूर्वक पढ़िए (द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की कविता पर आधारित)
प्रश्नोत्तरी:
तीन प्रश्न बनाइए:
बालक ईश्वर से अपने हृदय का क्या दूर करने की प्रार्थना कर रहा है?
कवि ने स्वयं को किसके समान बताया है?
कवि धरती को क्या बनाने का वरदान माँग रहा है?
मनचाहा शीर्षक: 'नन्हा पथिक' या 'मंगलमय वरदान'।
चित्र: (विद्यार्थी यहाँ एक छोटे बालक, सूर्य की किरणों और हरियाली का चित्र बना सकते हैं।)

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