कक्षा: 5
विषय: हिन्दी (वाटिका)
पाठ: 2
प्रकरण (Topic): पंच परमेश्वर (कहानी - मुंशी प्रेमचंद)
समय: 40 मिनट
1. शिक्षण उद्देश्य (Learning Objectives)
नैतिक मूल्य: छात्रों को न्याय की निष्पक्षता और 'पंच' के पद की गरिमा के बारे में बताना।
सामाजिक बोध: ग्रामीण जीवन की न्याय व्यवस्था (पंचायत) से परिचित कराना।
भाषा विकास: कठिन शब्दों के अर्थ समझना और मुहावरों का प्रयोग सीखना।
चरित्र निर्माण: मित्रता और सच्चाई के बीच सही संतुलन को समझना।
2. मुख्य पात्र (Characters)
जुम्मन शेख: जो पहले स्वार्थी होता है, लेकिन पंच बनने पर न्याय का साथ देता है।
अलगू चौधरी: जुम्मन का पक्का दोस्त, जो न्याय के लिए मित्रता की भी परवाह नहीं करता।
बूढ़ी खाला: जुम्मन की मौसी, जो न्याय के लिए पंचायत बुलाती है।
समझू साहू: एक लालची व्यापारी, जिसके कारण अलगू और जुम्मन फिर से करीब आते हैं।
3. पाठ का सारांश (Lesson Outline)
प्रारंभ: जुम्मन और अलगू की अटूट मित्रता का वर्णन।
प्रथम विवाद: जुम्मन द्वारा अपनी खाला की संपत्ति हड़पना और उसकी सेवा न करना। खाला का पंचायत बुलाना।
न्याय का पहला मोड़: अलगू चौधरी का पंच बनना और अपनी मित्रता के ऊपर न्याय को रखकर खाला के पक्ष में फैसला सुनाना। इससे दोनों की दोस्ती में दरार आना।
द्वितीय विवाद: अलगू के बैल की मृत्यु और समझू साहू द्वारा पैसे न देना। मामला फिर पंचायत में पहुँचना।
न्याय का दूसरा मोड़: इस बार जुम्मन शेख का पंच बनना। पंच की कुर्सी पर बैठते ही जुम्मन को अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना और अलगू के पक्ष में सही फैसला देना।
निष्कर्ष: "पंच के मुँह से खुदा बोलता है।" दोनों मित्रों का रोना और पुरानी कड़वाहट का मिट जाना।
5. बोध प्रश्न (Evaluation)
जुम्मन शेख और अलगू चौधरी की मित्रता कैसी थी?
खाला ने पंचायत क्यों बुलाई थी?
"पंच न किसी का दोस्त होता है, न किसी का दुश्मन" - यह किसने और क्यों कहा?
समझू साहू ने अलगू के बैल के पैसे देने से क्यों मना कर दिया था?
6. गृहकार्य (Homework)
पाठ में आए किन्हीं पाँच मुहावरों को छाँटकर उनके अर्थ लिखें और वाक्यों में प्रयोग करें।
"सच्चा मित्र" विषय पर 10 पंक्तियाँ लिखें।
1. बोध प्रश्न : उत्तर लिखिए —
(क) जायदाद की रजिस्ट्री होते ही जुम्मन का व्यवहार बदल गया। इससे जुम्मन के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है ?
जायदाद मिलने के बाद जुम्मन का व्यवहार बदल गया। इससे पता चलता है कि वह स्वार्थी और लालची स्वभाव का व्यक्ति था।
(ख) “मैं अलग पका-खा लूँगी” खाला ने ऐसा क्यों कहा ?
खाला को जुम्मन और उसकी पत्नी से उचित भोजन और सम्मान नहीं मिल रहा था। इसलिए उन्होंने अलग रहकर अपना भोजन बनाने की बात कही।
(ग) जुम्मन ने खाला को रोटी-कपड़ा देना क्यों कबूल किया था ?
जुम्मन ने खाला की संपत्ति अपने नाम करवाने के लिए उन्हें रोटी-कपड़ा देने की बात स्वीकार की थी।
(घ) फैसला सुनते ही जुम्मन सन्नाटे में क्यों आ गए ?
अलगू चौधरी ने न्याय करते हुए फैसला खाला के पक्ष में दिया। यह सुनकर जुम्मन को बहुत दुख और आश्चर्य हुआ, इसलिए वे सन्नाटे में आ गए।
(ङ) सरपंच का आसन ग्रहण करते हुए जुम्मन में कौन-सा भाव पैदा हुआ ?
सरपंच का आसन ग्रहण करते समय जुम्मन में न्याय और जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न हुआ।
2. सही विकल्प पर ✓ का निशान लगाइए —
(क)
✓ सरपंच का स्थान ग्रहण करने वाला व्यक्ति निष्पक्ष होकर न्याय करता है।
(ख)
✓ बैल की मृत्यु केवल इस कारण हुई कि उससे कठिन परिश्रम लिया गया और उसके दाने-चारे का प्रबंध नहीं किया गया।
3. सही क्रम में लिखिए —
1.उनके पास थोड़ी जायदाद थी, परंतु उनके निकट संबंधियों में कोई न था।
2.जुम्मन ने लंबे-चौड़े वायदे करके वह जायदाद अपने नाम लिखवा ली थी।
3.कुछ दिनों तक और यूँ ही रो-धोकर काम चलता रहा।
4.अलगू चौधरी ने जुम्मन से जिरह शुरू की।
5.सरपंच का आसन ग्रहण करते हुए जुम्मन में अपनी जिम्मेदारी का भाव पैदा हुआ।
6.एक दिन संध्या के समय एक पेड़ के नीचे पंचायत बैठी।
7.थोड़ी देर बाद जुम्मन अलगू के पास आए और उनके गले से लिपट गए।
4. किसने-किससे कहा —
(क)
“बेटा तुम्हारे साथ मेरा निर्वाह न होगा। तुम मुझे रुपये दे दिया करो, मैं अलग पका-खा लूँगी।”
→ खाला ने जुम्मन से कहा।
(ख)
“रुपये क्या यहाँ फलते हैं?”
→ जुम्मन ने खाला से कहा।
(ग)
“हम तुम पुराने दोस्त हैं, मगर इस समय तुम और बूढ़ी खाला दोनों हमारी निगाह में बराबर हो।”
→ अलगू चौधरी ने जुम्मन से कहा।
(घ)
“भाई पंचायत कर लो। जो कुछ तय हो जाए उसे स्वीकार कर लो।”
→ अलगू चौधरी ने खाला से कहा।
(ङ)
“समझू साहू को उचित है कि बैल का पूरा दाम दें।”
→ जुम्मन शेख ने पंचायत में कहा।
(च)
“पंच न किसी के दोस्त होते हैं, न किसी के दुश्मन।”
→ जुम्मन शेख ने अलगू चौधरी से कहा।
5. पंक्तियों का आशय —
(क)
“रजिस्ट्री की मुहर लगते ही खातिरदारी पर भी मुहर लग गई।”
अर्थ — जायदाद अपने नाम होते ही जुम्मन और उसकी पत्नी ने खाला की सेवा करना बंद कर दिया।
(ख)
“कुछ दिनों तक और यूँ ही रो-धोकर काम चलता रहा।”
अर्थ — कुछ समय तक खाला दुख सहकर किसी तरह अपना जीवन बिताती रहीं।
(ग)
“रुपये क्या यहाँ फलते हैं?”
अर्थ — जुम्मन यह कहना चाहता था कि उसके पास रुपये नहीं हैं।
(घ)
“जुम्मन का यह फैसला सुनते ही सर चकराने लगा।”
अर्थ — फैसला सुनकर अलगू को बहुत आश्चर्य और दुख हुआ।
(ङ)
“इस समय न्याय के सर्वोच्च आसन पर बैठा हूँ। सत्य से जो-मात्र भी टलना मेरे लिए उचित नहीं है।”
अर्थ — सरपंच बनने के बाद जुम्मन ने निष्पक्ष होकर न्याय करने का निश्चय किया।
6. भाषा के रंग —
(क) मुहावरों का प्रयोग —
1. मुहर लग जाना — पक्का हो जाना
वाक्य — प्रधानाचार्य ने छुट्टी के आवेदन पर मुहर लगा दी।
2. सिर माथे चढ़ाना — बहुत सम्मान देना
वाक्य — दादी अपने पोते को सिर माथे चढ़ाती हैं।
3. सामने आ जाना — उपस्थित होना
वाक्य — सच एक दिन सबके सामने आ जाता है।
4. कलजा धक-धक करना — घबराना
वाक्य — परीक्षा का परिणाम सुनकर मेरा कलजा धक-धक करने लगा।
5. दिल का मैल धुल जाना — मन की बुराई समाप्त हो जाना
वाक्य — मित्र से मिलकर उसका दिल का मैल धुल गया।
(ख) तत्सम रूप लिखिए —
निबल — निर्बल
मुँह — मुख
पहर — प्रहर
घर — गृह
पूरा — पूर्ण
भारत — भारत
7. तुम्हारी कलम से —
सरपंच कैसा होना चाहिए ?
सरपंच ईमानदार, न्यायप्रिय और समझदार होना चाहिए। उसे बिना भेदभाव के सबके साथ समान व्यवहार करना चाहिए। सरपंच को गाँव के लोगों की समस्याओं को ध्यान से सुनकर सही निर्णय लेना चाहिए।
8. अब करने की बारी —
(क) कहानी अपने शब्दों में —
यह कहानी “पंच परमेश्वर” न्याय और सच्चाई की शिक्षा देती है। जुम्मन शेख ने अपनी बूढ़ी खाला की संपत्ति अपने नाम करवा ली, लेकिन बाद में उनकी सेवा नहीं की। पंचायत में अलगू चौधरी ने न्याय करते हुए खाला के पक्ष में फैसला दिया। बाद में जुम्मन भी सरपंच बने और उन्होंने निष्पक्ष होकर अलगू के पक्ष में फैसला सुनाया। अंत में दोनों मित्र फिर से मिल गए।
(ख) घटना/विवाद का उदाहरण —
हमारे गाँव में खेत की मेड़ को लेकर दो लोगों में विवाद हो गया। पंचायत बैठी और दोनों पक्षों की बातें सुनी गईं। अंत में सही व्यक्ति के पक्ष में न्यायपूर्ण फैसला दिया गया।
(ग) अभिनय हेतु संवाद —
“पंच का पद बहुत बड़ा होता है। पंच को हमेशा न्याय करना चाहिए।”
9. मेरे दो प्रश्न —
खाला ने पंचायत बुलाने का निर्णय क्यों लिया ?
अलगू चौधरी ने निष्पक्ष फैसला क्यों दिया ?
10. इस कहानी से —
(क) मैंने सीखा —
हमें हमेशा न्याय और सत्य का साथ देना चाहिए।
(ख) मैं करूँगी / करूँगा —
मैं सबके साथ ईमानदारी और निष्पक्षता का व्यवहार करूँगी / करूँगा।