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कक्षा 5 विषय हिंदी शिक्षण योजना पाठ 3: मेरी शिक्षा (पाठ योजना/अभ्यास कार्य/ एक्टिविटी)

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शिक्षण योजना (Lesson Plan)
कक्षा: 5
विषय: हिंदी (वाटिका)
पाठ 3: मेरी शिक्षा (आत्मकथा अंश)
समय: 40 मिनट
1. सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes)
बच्चे डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रारंभिक जीवन और उनके संघर्षों को समझ सकेंगे।
विद्यार्थी पुरानी शिक्षा पद्धति (मदरसा, मौलवी साहब, तख्ती पर लिखना) से परिचित होंगे।
नए शब्दों और मुहावरों का अर्थ समझकर अपने वाक्यों में प्रयोग कर सकेंगे।
बच्चों में अनुशासन और पढ़ाई के प्रति एकाग्रता का भाव पैदा होगा।
2. शिक्षण सहायक सामग्री (TLM)
पाठ्यपुस्तक (वाटिका-5)।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का चित्र।
तख्ती, कलम और दवात (या उनका चित्र)।
3. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (Teaching Process)4. श्यामपट्ट कार्य (Blackboard Work)
पाठ: मेरी शिक्षा (लेखक: डॉ. राजेंद्र प्रसाद)
कठिन शब्दार्थ:
अक्षरारंभ: शिक्षा की शुरुआत।
तालीम: शिक्षा/ज्ञान।
कौतूहल: जिज्ञासा या जानने की इच्छा।
निहायत: बहुत अधिक।
महत्वपूर्ण तथ्य: डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 1884 में हुआ और वे स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति बने।
5. मूल्यांकन (Assessment)
मौलवी साहब बच्चों को कौन-कौन से खेल और विषय सिखाते थे?
देर तक पढ़ाई से बचने के लिए बच्चे क्या तरकीब निकालते थे?
राजेंद्र बाबू के साथ और कौन-कौन पढ़ता था?
6. गृह कार्य (Homework)
अपनी पढ़ाई या स्कूल से जुड़ा कोई एक रोचक किस्सा लिखकर लाएं।
पाठ में आए किन्हीं 5 संज्ञा शब्दों को छाँटकर अपनी कॉपी में लिखें।

अभ्यास समाधान (वाटिका - 5)

1. बोध प्रश्न : उत्तर लिखिए
(क) बालक राजेंद्र प्रसाद का अक्षरारंभ किसने करवाया था?
उत्तर: बालक राजेंद्र प्रसाद का अक्षरारंभ एक मौलवी साहब ने करवाया था।
(ख) उनके साथ कौन-कौन पढ़ता था?
उत्तर: उनके साथ उनके दो चचेरे भाई पढ़ते थे। (यमुना भाई और एक अन्य भाई)
(ग) पहले मौलवी साहब और दूसरे मौलवी साहब में क्या अंतर था?
उत्तर: पहले मौलवी साहब बहुत विचित्र थे और बहुत सी बातें जानते थे, लेकिन वे खेल-कूद में भी रुचि लेते थे। इसके विपरीत, दूसरे मौलवी साहब बहुत गंभीर थे और अच्छा पढ़ाते भी थे।
(घ) देर तक न पढ़ना पड़े इसके लिए जमुना भाई क्या चाल चलते थे?
उत्तर: देर तक न पढ़ना पड़े इसके लिए जमुना भाई दीये की बत्ती में थोड़ा सा तेल डाल देते थे, जिससे दीया जल्दी बुझ जाता और उन्हें पढ़ाई से छुट्टी मिल जाती थी।
2. सोच-विचार : बताइए
दूसरे वाले मौलवी साहब के बारे में ऐसा क्यों कहा गया कि "वे बहुत गंभीर थे और अच्छा पढ़ाते भी थे।"
उत्तर: ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि वे पढ़ाई को लेकर सख्त थे और उनका ध्यान मुख्य रूप से बच्चों को सिखाने पर रहता था। उनके आने के बाद बच्चों की खेल-कूद और शरारतें कम हो गई थीं।
3. भाषा के रंग
(क) शब्दों को सही क्रम में लिखकर वाक्य बनाइए:
कोठरी/करते/रहा/में/वे/एक/थे
उत्तर: वे एक कोठरी में रहा करते थे।
समय/भी/था/खेलने/-/के/लिए/कूदने/दिया/जाता
उत्तर: खेल-कूद के लिए भी समय दिया जाता था।
आधा/प्राय:/मिलती/छुट्टी/घंटे/की/थी
उत्तर: प्राय: आधे घंटे की छुट्टी मिलती थी।
चारपाई/साहब/सोते/पर/मौलवी/थे
उत्तर: मौलवी साहब चारपाई पर सोते थे।
(ख) विलोम अर्थ वाले शब्दों के जोड़े:
छोटे - बड़े
इधर - उधर
आगे - पीछे
ऊपर - नीचे
दिन - रात
(ग) एक ही शब्द की आवृत्ति वाले जोड़े (पुनरुक्त शब्द):
धीरे-धीरे
तरह-तरह
बार-बार
कभी-कभी
कोने-कोने
(घ) 'बे' उपसर्ग वाले शब्द और उनके अर्थ:
बेदाग: बिना दाग के (साफ)
बेकसूर: जिसका कोई कसूर न हो (निर्दोष)
बेघर: जिसका कोई घर न हो
बेवजह: बिना किसी कारण के
बेहिसाब: जिसकी कोई गिनती न हो (बहुत अधिक)
बेमिसाल: जिसकी कोई मिसाल न हो (अनोखा)
4. तुम्हारी कलम से
(ये उत्तर छात्र को अपने अनुभव के आधार पर देने चाहिए, यहाँ उदाहरण दिए गए हैं)
(क) मेरा अक्षरारंभ 4 वर्ष की उम्र में घर पर ही मेरी माँ द्वारा कराया गया था।
(ख) मैं अपने स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे विषय पढ़ता हूँ।
(ग) मुझे विज्ञान विषय सबसे अच्छा लगता है क्योंकि इसमें नई चीज़ों के बारे में जानने को मिलता है।
5. अब करने की बारी
(ख) "सपने वो नहीं, जो आप सोते वक्त देखते हैं। सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।" यह प्रसिद्ध वाक्य किसका है?
उत्तर: यह प्रसिद्ध वाक्य भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का है।
6. मेरे दो प्रश्न
मौलवी साहब बच्चों को क्या-क्या पढ़ाते थे?
राजेंद्र प्रसाद और उनके भाई मौलवी साहब के पास कहाँ पढ़ने जाते थे?
7. इस पाठ से —
(क) मैंने सीखा — कि मेहनत और अनुशासन से हम जीवन में ऊँचे पद तक पहुँच सकते हैं।
(ख) मैं करूँगी/करूँगा — मैं भी अपनी पढ़ाई पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करूँगा।

पाठ के आधार पर आप विद्यार्थियों के लिए कुछ मजेदार और शिक्षाप्रद गतिविधियाँ (Activities) आयोजित कर सकते हैं। ये गतिविधियाँ बच्चों को पाठ की गहराई और महान व्यक्तित्वों के जीवन को समझने में मदद करेंगी:

1. आत्मकथा लेखन (My Story)
पाठ के अंत में 'यह भी जानिए' अनुभाग में आत्मकथा के बारे में बताया गया है।
गतिविधि: बच्चों को कहें कि वे अपने जीवन की किसी एक यादगार घटना (जैसे- स्कूल का पहला दिन, कोई पुरस्कार जीतना या कोई शरारत) को एक अनुच्छेद में लिखें।
उद्देश्य: बच्चों में स्वयं के अनुभवों को व्यक्त करने और लेखन कौशल का विकास करना।
2. 'बे' उपसर्ग का खेल (Vocabulary Building)
पाठ में 'बे' उपसर्ग (Prefix) का प्रयोग हुआ है।
गतिविधि: ब्लैकबोर्ड पर 'बे' लिखें और बच्चों से कहें कि वे इससे बनने वाले नए शब्द सोचें (जैसे: बेकाम, बेनाम, बेचैन, बेअकल)।
उद्देश्य: नए शब्दों के निर्माण और व्याकरण की समझ बढ़ाना।
3. 'मौलवी साहब' का रोल प्ले (Drama/Role Play)
पाठ में दो तरह के मौलवी साहबों का वर्णन है।
गतिविधि: कक्षा के दो बच्चों को अलग-अलग मौलवी साहबों का किरदार निभाने को कहें—एक जो बहुत बातें जानते थे और खेल-कूद में रुचि रखते थे, और दूसरे जो बहुत गंभीर थे। बाकी बच्चे राजेंद्र प्रसाद और उनके भाइयों का किरदार निभा सकते हैं।
उद्देश्य: पात्रों के स्वभाव और उनके बीच के अंतर को जीवंत रूप से समझना।
4. सपनों का कोलाज (Inspiration Activity)
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रसिद्ध वाक्य "सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते" पर आधारित।
गतिविधि: बच्चों से पूछें कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं या उनका क्या सपना है। उन्हें अपने सपने से जुड़ी एक ड्राइंग बनाने या उसके बारे में दो पंक्तियाँ लिखने को कहें।
उद्देश्य: बच्चों को लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करना।
5. पुराने समय की पाठशाला बनाम आज का स्कूल
राजेंद्र प्रसाद जी के समय में पढ़ाई कोठरी में दीये की रोशनी में होती थी।
गतिविधि: एक चर्चा (Discussion) आयोजित करें जहाँ बच्चे तुलना करें कि आज के डिजिटल क्लासरूम और पुराने समय की शिक्षा पद्धति में क्या अंतर है।
बिंदु: रोशनी (दीया बनाम बिजली), बैठने की जगह (टाट-पट्टी बनाम डेस्क), लिखने के साधन (कलम-दवात बनाम पेन/लैपटॉप)।

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